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12- भक्त नरसी का जीवन व्रतांत PDF

भक्तों यह एक पुस्तक नहीं, यह एक एक ग्रन्थ है। यह आपकी, भगवान श्री कृष्ण के प्रति आस्था एवं विश्वास पर आधारित है जैसे कहा गया है कि “मानो तो देव नहीं तो पत्थर” जहां प्रभु की लीलाओं का गुणगान हो रहा हो वह स्थान पवित्र माना जाता है प्रभु की लीलाओं का गुणगान करने वाले सन्त पूजनीय होते हैं ,इसी प्रकार जिस पुस्तक में प्रभु की लीलाओं का वर्णन हो वह पुस्तक भी पूजनीय अर्थात ग्रंथ बन जाती है। ऐसा ग्रंथ जिसके द्वारा संगीतमय स्वर लहरियों में प्रभु की लीलाओं को पढ़ने और सुनने से व्यक्ति का मन एकाग्र व आनंदित हो जाता है और अभ्यास करते-करते प्रभु चरणों में पूर्णतया समर्पित हो जाता हो, सम्मानीय ही है। इसी आशा और विश्वास के आधार पर इस ग्रंथ की रचना की गई है इससे पूर्व ऐसे किसी ग्रंथ की रचना नहीं हुई है। जिसमें भगवान श्री कृष्ण के संपूर्ण जीवन (प्राकट्य से परायण तक) की लीलाओं का विवरण क्रमबद्ध हो। यह पुस्तक चौपाई, दोहा, सोरठा व छंद की विधा में, सरल भाषा में टीका सहित लिखी गई है। इस पुस्तक के साथ अपने इष्ट भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र चित्रण के अनुसार “श्री कृष्ण चालीसा” की रचना की गई है !

 

 

 

Description

लेखक के बारें में :-

प्रिय कृष्ण भक्तों, आज आप सभी को ये बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि सतत् प्रयास के बाद माँ सरस्वती की कृपा और हम सभी के इष्ट, भगवान् श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से मेंने अपनी अंतरात्मा की आवाज को इस परम पवित्र ग्रंथ के रूप में उन सभी भक्तों को, जो भगवान् श्रीकृष्ण के परम भक्त हैं, अर्पित किया है। मेरे मन में काफी समय से एक विचार था कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम के सम्पूर्ण जीवन की घटनाओं को क्रमबद्ध रूप से वर्णन करने वाला एक ग्रंथ “श्री राम चरित मानस” सभी राम भक्तों के लिए जीवन का आधार है, मगर श्रीकृष्ण भक्तो के लिए अपने इष्ट लीला पुरुषोत्तम महायोगी भगवान् श्रीकृष्ण के 125 वर्ष के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का विवरण क्रमबद्ध पद्यरूप में किसी ग्रंथ में नहीं है।अलग अलग लीलाओं के अलग अलग वर्णन तो उपलब्ध हैं,

 

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